October 28, 2021
कविता एवं शायरी

ग़ज़ल- तू अपनी जान पे तलवार बन के बैठा है अमीर हो के भी नादार बन के बैठा है – "ख़ान"अशफाक़ ख़ान

ग़ज़ल- तू अपनी जान पे तलवार बन के बैठा है अमीर हो के भी नादार बन के बैठा है – "ख़ान"अशफाक़ ख़ान

तू अपनी जान पे तलवार बन के बैठा है
अमीर हो के भी नादार बन के बैठा है
मेरी अना ने ही मगरूर कर दिया मुझको
मेरा वजूद ही दीवार बन के बैठा है
मैं तेरे शह्र में अनजान बन के रहता हूँ
न जाने कौन है ? दिलदार बन के बैठा है
मैं तेज धूप में सर को छुपाने आया था
यहाँ तो शम्स ही दीवार बन के बैठा है
चमन में तितलियाँ आएं तो किसलिए आएं
यहाँ तो माली ही पुर खार बन के बैठा है
“ख़ान”अशफाक़ ख़ान

About Author

Team TH

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *