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26/11 के रीयल हीरोज की कहानी

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मुंबई हमले को नौ साल हो गए हैं. दो दिनों तक मुट्ठी भर आतंकवादियों ने देश की आर्थिक राजधानी को बंधक बना रखा था. ये देश के सबसे हाईप्रोफाइल इलाकों में से एक पर किया गया हमला था.वो दिन जब मुंबई सिहर गई थी. यह दिन उन तारीखों में से एक बन चुकी है जो भारत के इतिहास में अपनी जगह खून से लाल और धुँए से काले पड़ चुके अक्षरों में दर्ज हो चुकी है. 60 घंटों तक चले संघर्ष ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था. उल्लेखनीय है 2008 के इस हमले में अजमल कसाब नाम का एक आतंकी अपने 9 अन्य सहयोगियों के साथ समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचा था. इस दिन दुनिया गवाह बनी खून से सने फर्श पर बिखरे काँच और मासूम लोगों की लाशों के बीच होती गोलियों की बौछार की, बदहवासी में जानबचा कर भागते लोग, सीमित हथियारों पर अदम्य हौसले से आतंकी हमले का मुकाबला करते सुरक्षाकर्मी की दिलेरी की. सुरक्षाकर्मी जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगते हुए कई लोगों की जान बचाई.
आइये जानते है कुछ इसे ही नायकों की कहानी

हेमंत करकरे

26/11 आतंकी हमले में शहीद तत्कालीन एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे का जन्म 12 दिसंबर 1954 को करहड़े ब्राह्मण परिवार में हुआ था. अपने परिवार में हेमंत तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े थे. उनकी प्रारंभिक शिक्षा वर्धा के चितरंजन दास स्कूल में हुई थी. 1975 में उन्होंने विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नागपुर से मैकेनिकल इंजीनियर की डिग्री ली. उन्होंने हिंदुस्तान यूनीलिवर में नौकरी भी की थी.
1982 में वो आईपीएस अधिकारी बने. महाराष्ट्र के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर के बाद इनको एटीएस चीफ बनाया गया था. इस दौरान इन्होंने कई कारनामे किए. वह ऑस्ट्रिया में भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के अधिकारी के रूप में सात साल तक तैनात थे. चंद्रपुर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में भी काम किया था. नॉरकोटिक्स विभाग में तैनाती के दौरान उन्होंने पहली बार विदेशी ड्रग्स माफिया को गिरगांव चौपाटी के पास मार गिराने का कारनामा कर दिखाया था. 8 सितंबर 2006 में महाराष्ट्र के मालेगांव में सीरियल ब्लास्ट हुए थे. इसकी जांच हेमंत करकरे को सौंपी गई थी.

शहीद हेमंत करकरे


26 नवंबर 2008 में मुंबई में आतंकी हमला हुआ. हेमंत करकरे दादर स्थित अपने घर पर थे. वह फौरन अपने दस्ते के साथ मौके पर पहुंचे. उसी समय उनको खबर मिली कि कॉर्पोरेशन बैंक के एटीएम के पास आतंकी एक लाल रंग की कार के पीछे छिपे हुए हैं. वहां तुरंत पहुंचे तो आतंकी फायरिंग करने लगे. इसी दौरान एक गोली एक आतंकी के कंधे पर लगी. वो घायल हो गया. उसके हाथ से एके-47 गिर गया. वह आतंकी अजमल कसाब था, जिसे करकरे ने धर दबोचा. इसी दौरान आतंकियों की ओर से जवाबी फायरिंग में तीन गोली इस बहादुर जवान को भी लगी, जिसके बाद वह शहीद हो गए.
हेमंत करकरे के साथ सेना के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, मुंबई पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त अशोक कामटे और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विजय सालस्कर शहीद हो गए. 26 नवंबर 2009 में इस शहीद की शहादत को सलाम करते हुए भारत सरकार ने मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया.

तुकाराम ओम्बले

मुंबई में आतंकियों के हमले का कड़ा जवाब देने वाले पुलिस में सुब-इंस्पेक्टर तुकाराम ओंबाले भी शहीद हो गए थे. हमले के दौरान ओंबाले  ड्यूटी कर रहे थे. जब कसाब और उसके अन्य साथी हमला करते हुए यहां पहुंचे ओंबाले ने कसाब को पकड़ने की कोशिश की थी. हालांकि कसाब के साथियों ने ओंबाले पर खूब गोलीबारी की. लेकिन ओंबाले के साहस के कसाब को उसके साथी वहां से नहीं निकाल पाए और अन्य आतंकी घायल कसाब को वहीं छोड़ भाग निकले. कसाब जख्मी स्थिति में वहीं पड़ा रहा, ओंबाले की बहादुरी के कारण ही बाद में मुंबई पुलिस को कसाब को ज़िंदा हालत में पकड़ने में कामयाबी मिली. अंत में ओंबाले को 5 गोलियां लगी और वो इस हमले में शहीद हो गए थे. बाद में अदम्य साहस के लिए 26 जनवरी 2009 को तुकाराम को मरणोपरांत अशोक चक्र देकर एक शहीद का सम्मान किया गया.

तुकाराम ओंबाले


संदीप उन्नीकृष्णन

संदीप उन्नीकृष्णन


अपनी जान पर खेलकर कई लोगों की जान बचाने वाले मेजर संदीप उन्नीकृष्णनन का जन्म 15 मार्च 1977 को हुआ था.ये उस वक्त एनएसजी में कमांडो थे. ऑपरेशन ब्लैक टोरनेडो  को अंजाम देने के लिए इन्होंने 10 कमांडों के साथ होटल में प्रवेश किया था. इनको पता चला था कि होटल के तीसरे ताल पर आंतकियों ने कुछ महिलाओं को बंधक बना लिया है, तब इनके सहयोगी सुनील यादव ने दरवाजा तोड़ा, तब वो आंतकियों की गोलीबारी से घायल हो गये. संदीप सुनील को बचाने के लिए आगे आये और अन्य साथियों से कहा अब ऊपर मत आना, मैं उन्हें संभाल लूंगा.इसके दौरान मुंबई के ताज होटल के अन्दर सशस्त्र आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हो गए. उनका सामना करते करते मेजर उन्नीकृष्णन गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हो गये. बाद में 26 जनवरी 2009 को मरणोपरांत  अशोक चक्र से सम्मानित किया गया.
विजय सालस्कर 

विजय सालस्कर


ऐसे ही एक और बहादुर अधिकारी थे, विजय सालस्कर. विजय, मुंबई पुलिस में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में मशहूर थे. वे मुंबई पुलिस में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक थे. सालस्कर ने अपने 25 साल के करियर में 75 से 80 अपराधियों को मार गिराया था. शहीद होने से पहले सालस्कर एंटी एक्सटॉर्सन सेल में इंचार्ज थे. मुंबई में शहीद होने के बाद 26 जनवरी 2009 को मरणोपरांत अशोक च्रक से सम्मानित किया गया था.
अशोक कामटे
 

अशोक कामटे


 इस हमले में एक और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शहीद हुए थे. ये शहीद अधिकारी अतिरिक्त आयुक्त अशोक कामटे थे. IPS अफसर अशोक कामटे महाराष्ट्र के पुणे के सांघवी के रहने वाले थे. कामटे 1989 आईपीएस बैच के अधिकारी थे. अशोक कामटे 1989 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी थे. वह अपने बैच में स्कॉलर थे. ये मुंबई पुलिस में अशोक कामटे बॉडी बिल्डर के नाम से मशहूर थे. इनको बॉडी बिल्डिंग का शौक था. वह कॉलेज के दिनों में अखाड़े और जिम में जाया करते थे. मुंबई में 26/11 हमले के दौरान हुए आतंकवादी हमले के दौरान इनको जिम्मेदारी सौंपी गई थी. बताया जाता है कि अशोक ने आतंकवादियों से बातचीत की स्पेशल ट्रेनिंग ली थी.आतंकियों के खिलाफ इस अभियान दौरान कामटे को गोली लग गई और वह शहीद हो गए. अशोक कामटे को भारत सरकार की ओर से अशोक चक्र दिया गया है. बाद में इनकी पत्नी विनीता ने उन पर ‘टू द लास्ट बुलेट’ नाम से किताब लिखी है.
देविका राेतवान

देविका


इस हमले में गोली लगने से घायल हुई थी देविका राेतवान. गोली लगने से  देविका 6 ऑपरेशन करवा चुकी है. देविका ने आतंकी अजमल कसाब के खिलाफ गवाही देने वाली और उसे फांसी की सजा दिलवाने में अहम भूमिका निभाई थी. देविका जब केवल 9 साल की थी. बीबीसी से इन्होंने बताया कि वह बड़ी होकर पुलिस अधीक्षक बनना चाहती है और देश सेवा करना चाहती है.