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क्या कांग्रेस में जान आ रही है, या फिर यूपी का मन बदल रहा है ?

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लखनऊ/वाराणसी : जिस तरह से पिछले एक सप्ताह से कांग्रेस के प्रचार करने के तरीके दिख रहे हैं, इन नए तरीकों से कांग्रेस उत्तरप्रदेश में चर्चा का विषय तो बन गई है. कुछ समय पूर्व कांग्रेस का उत्तरप्रदेश में कोई नामलेवा नज़र नहीं आता था| अचानक से एसा क्या हुआ जो यूपी में कांग्रेस को सत्ता की दौड़ में गिना जाने लगा है. जानकार बताते हैं, की उत्तरप्रदेश में कांग्रेस का चर्चा में आने की एक वजह कांग्रेस नेताओं के बीच से गुटबाजी का खत्म होना है, इसमें प्रियंका गांधी अहम् फैक्टर मानी जा रही हैं| ज्ञात हो कुछ दिन पूर्व यूपी कांग्रेस ने अपनी नई टीम लांच की थी,राजबब्बर जैसा जाना पहचाना चेहरा और उनके साथ चार उपाध्यक्ष की घोषणा भी कांग्रेस आलाकमान ने की थी. चारों ही उपाध्यक्ष अलग-अलग जातियों व समुदायों का प्रतिनिधित्व करते है| साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों से इनका सम्बन्ध और पैठ है| कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार PK का हर दांव फिलहाल फिट बैठता नज़र आ रहा है| मुख्यमंत्री पद के रूप में शीला दीक्षित को उम्मीदवार घोषित किये जाने के बाद से ब्राम्हण कांग्रेस की तरफ गोलबंद होते दिखाई दे रहे हैं| लखनऊ में कांग्रेस का सफल यूपी उद्घोष प्रोग्राम और वहां राहुल गांधी के बदले अंदाज़ की चर्चा भी चारों और है|
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चुनावी जानकारों की मानें तो राहुल गांधी की ये सादगी दर्शकों के बीच न सिर्फ चर्चा की वजह बना बल्कि इससे पार्टी नेताओं को भी एक मैसेज मिला की कांग्रेस को यदि सत्ता में वापसी करना है, तो सादगी अपनाना होगा |क्योंकि जनता सादगी पसंद करती है, दिल्ली में आम आदमी पार्टी और बिहार में नीतीश व लालू की पहचान भी सादगीपसंद राजनेताओं की है|

लखनऊ में रैम्प पर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते राहुल गांधी