October 28, 2021
विशेष

जहाँ राष्ट्रपिता ने देश को आजाद कराने की रणनीति बनाई

जहाँ राष्ट्रपिता ने देश को आजाद कराने की रणनीति बनाई

महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी में स्थित एक मानित राजपत्रित विश्वविद्यालय है. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का इतिहास बड़ा ही अनोखा है.पहले इसे सिर्फ काशी विद्यापीठ ही कहा जाता था,लेकिन बाद में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर इसका नाम “महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ” कर दिया गया. उन्होंने स्वयं यहां पर खुद सूत काता था और एक सप्ताह तक रह कर देश को आजाद करने की रणनीति बनायी थी.स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में भी काशी विद्यापीठ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ की स्थापना  10 फ़रवरी सन् 1920 में बाबू शिव प्रसाद गुप्त ने की थी और गांधीजी ने इसकी आधारशिला रखी थी. शिव प्रसाद जी राष्ट्रवादी शिक्षाविद थे जिन्होंने बिना किसी से आर्थिक सहयोग लिए ही नैतिकता व देश की संस्कृति का ज्ञान देने के लिए एक विशाल परिसर की स्थापना की थी. जुलाई 1963 में इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मानद विश्वविद्यालय घोषित किया गया.इस विश्वविद्यालय में स्नातक, परा स्नातक एवं अनुसंधान स्तर की शिक्षा उपलब्ध है.

परिसर से जुड़े हैं कई महापुरुष

काशी विद्यापीठ से जुड़े महापुरुषों की सूची बहुत लंबी है. राष्ट्ररत्न शिवप्रसाद गुप्ता व महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अतिरिक्त नरेन्द्र देव, भगवानदास जी, डा.सम्पूर्णानंद आदि महापुरुष परिसर से जुड़े रहे. काशी विद्यापीठ का इतिहास प्राचीन होने के साथ गौरवशाली भी है. आजादी की लड़ाई के समय कई क्रांतिकारियों ने काशी विद्यापीठ के छात्रावास में शरण ली और समय-समय पर यही सें स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई का बिगुल भी बजाया जाता था.
प्रमुख राष्ट्रवादी व विद्वान् आचार्य नरेन्द्र देव, भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, जीवत राम कृपलानी, बाबू श्रीप्रकाश, बाबू सम्पूर्णानन्द आदि महान् लोगों ने इसमें शिक्षण कार्य किया. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने भी इस विद्यापीठ से शिक्षा ग्रहण की थी.
इस विद्यापीठ में गाँधी जी के सिद्धांतों का पालन किया जाता है. महात्मा गाँधी के स्वावलम्बन तथा स्वराज के आह्वान से प्रेरित होकर ब्रिटिश शासनकाल में भारतीयों द्वारा स्थापित यह पहला आधुनिक विश्वविद्यालय था. अपने समकालीन गुजरात विद्यापीठ व जामिया इस्लामिया की भांति यह विद्यापीठ भी पूरी तरह ब्रिटिश अधिकारियों के नियंत्रण और सहायता से परे था.भारतीय शिक्षाविद और राष्ट्रप्रेमी लोग ही इसका सारा प्रबन्धन और देखरेख करते थे.

परिसर में अब लड़ी जा रही राष्ट्रीय महत्व संस्था की लड़ाई

काशी विद्यापीठ प्रशासन अब राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित करने की लड़ाई लड़ रहा है. वर्षोे पूर्व नैक की टीम परिसर आयी थी और जब काशी विद्यापीठ के इतिहास की जानकारी हुई तो सदस्यों ने कहा था कि इस संस्था का इतना शानदार इतिहास है कि राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित होनी चाहिए. काशी विद्यापीठ प्रशासन ने इस संदर्भ में केन्द्र व राज्य सरकार को भी प्रस्ताव भेजा है जिस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है.

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Durgesh Dehriya

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