October 24, 2021
देश

बेहतर अर्थव्यवस्था के लिए ज़रूरी है, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी

बेहतर अर्थव्यवस्था के लिए ज़रूरी है, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी

महिलाओं का भारत मे स्थान व महत्व समय के साथ बढ़ता आया है, सामाजिक रूप से उन्मुक्तता आई है. राजनीतिक रूप से पुरुषों के समान अधिकार प्रदान किए गए हैं. आर्थिक रूप से भी धीरे धीरे महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है,लेकिन अभी यह उस स्तर तक नहीं पहुँची जिसको लेकर हम संतुष्ट हो सके.
हाल ही में इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (एआईएमएफ) द्वारा की गई एक एक रिसर्च सामने आई है, जिसमे कहा गया है कि यदि भारत मे महिलाओं को भी पुरुषों की तरह वर्कफोर्स में भागीदारी करने का मौका दिया जाए तो देश की जीडीपी 27 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।

भारत की कुल आबादी में महिलाएं आधा हिस्सा रखती है और आधी आबादी को वर्कफोर्स से बाहर रहना महिलाओं के साथ साथ देश के लिए भी नुकसानदेह है।

भारत मे पहले से ही अधिक से अधिक महिलाओं को नौकरी करने के लिए प्रोत्साहित करने की पहल हो चुकी है, ताकि अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में जेंडर गैप कम करने की कोशिश की जा सके, इसमें कुछ महत्वपूर्ण कदम भी रहे है. जैसे- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और सुकन्या समृद्धि योजनाएं लाना है, 26 हफ़्तों की मैटरनिटी लीव अब बढ़ा दी गई है. 50 से अधिक एम्प्लॉयज़ वाली कंपनी में क्रैच की सुविधा देने का प्रावधान किया गया है, 2013 के कंपनीज एक्ट में कंपनियों के बोर्ड में कम से कम एक महिला डायरेक्टर का होना ज़रूरी बना दिया.
प्राइम डेटा बेस के अनुसार एनएसआई में लिस्टेड 1723 कंपनीयो में से 1667 के बोर्ड में एक महिला डायरेक्टर है, इसके अलावा आईएमएफ की रिसर्च में भारत मे अलग अलग क्षेत्रो में महिलाओं की भागीदारी व पुरुषों के मुकाबले उनकी स्थिती को दर्शाने वाले भी कुछ आंकड़े सामने आए है, मुख्य रूप से यह रिसर्च कुछ क्षेत्रो को ध्यान में रख कर की गई है.

  • धन दौलत की बात की जाए, तो भारत मे अरबपतियों की संख्या 101 है जबकि इनमे से सिर्फ 4 ही महिलायें है.
  • वेतन असमानता – औसतन घंटेवार सैलरी (2016) को देखते हुए इसमें पुरुष 345.8 व महिलाएं 259.8 पर है, इसके अलावा (2015-2016) में पति के बराबर या उनसे अधिक कमाने वाली महिलाओं के प्रतिशत 42.8 था जो (2005-2006) में सिर्फ 21.2 प्रतिशत था.
  • लेबर फोर्स में भागीदारी में भारत विश्व के 144 देशों में 139 वां स्थान रखता है व 76 वां स्थान मंत्रिपद में तादात के क्षेत्र में.
  • सशक्तिकरण की यदि बात करें तो बड़े घरलू समान खरीदने में जहाँ महिलाओं की भागीदारी 2005-2006 में 52.9 प्रतिशत थी, 2015-2016 में बढ़कर 73.4 प्रतिशत हो गई, अपनी आय को लेकर फैसले लेने वाली महिलाओं की संख्या 2005-2006 व 2015-2016 में समान ही रही 82.1 प्रतिशत.
  • आर्म्ड फोर्सेज़ के क्षेत्र में 8.5 प्रतिशत महिलाएं एयरफोर्स में , 3 प्रतिशत आर्मी में , 2.8 प्रतिशत महिलाएं नेवी में है
  • महिलाओं के बिज़नेस में मालिकाना हक को देखे तो 54 देशो में भारत का 49 वां स्थान है.
  • भारत मे 15 साल से ज़्यादा की उम्र की रोज़गार पेशा आबादी में 81.3 प्रतिशत पुरुष की व 35.8 प्रतिशत संख्या महिलाओं की है.
  • राजनीति की यदि बात की जाए तो लोकसभा में 11.8 प्रतिशत और राज्यसभा में 11प्रतिशत संख्या महिलाओं की है.
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Ankita Chauhan

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