0

अपनी कप्तानी के लिए चुने जाते थे, टाईगर पटौदी

Share

अगर किसी क्रिकेटर की एक आंख खराब हो जाए और उसे क्रिकेट खेलने के लिए कहा जाए तो शायद वह अपने आपको क्रिकेट से दूर ही रखना चाहेगा, लेकिन एक ऐसा क्रिकेट खिलाड़ी था, जिसने एक आंख खराब होने के बावजूद भी क्रिकेट खेलना नहीं छोड़ा. उन्होंने एक आंख के साथ अंतरराष्ट्रीय मैच में पदार्पण किया और भारत के लिए 46 टेस्ट मैच खेले जिनमें 40 टेस्ट मैचों में कप्तानी भी की. पटौदी ने भारत के लिए 47 टेस्ट खेले जिनमें 40 टेस्ट मैचों में उन्होंने भारत की कप्तानी की . हालाँकि सिर्फ़ नौ टेस्ट मैचों में उन्होंने जीत दर्ज की और 19 बार वो हारे.लेकिन जिस जुझारूपन से उन्होंने खेला वाकई में सिर्फ वही ऐसा कर सकते थे.
Related image
जी हां जिस क्रिकेटर की हम बात कर रहे हैं वह हैं नवाब मंसूर अली खान पटौदी. टाइगर के नाम से प्रसिद्ध नवाब पटौदी की बात इसीलिए हो रही है,क्योंकि 5 जनवरी को उनका जन्मदिन था. नवाब मंसूर अली खान पटौदी का जन्म 5 जनवरी 1941 को भोपाल में हुआ था. पटौदी के पिता इफ्तिखार अली खान पटौदी ने भी भारत के लिए छह टेस्ट के साथ-साथ 127 प्रथम श्रेणी मैच खेले .अपने पिता की ही तरह वे भी एक क्रिकेटर बनना चाहते थे. 5 जनवरी को पटौदी के जन्मदिन के साथ साथउनके पिता की पुण्यतिथि भी है.

16 वर्षीय पटौदी, 1 9 57 में होव में पूर्व ससेक्स के जॉर्ज कॉक्स से बात करते हुए


खिलाड़ी के रूप में मंसूर अली खान पटौदी की जितनी भी तारीफ की जाए वह कम है. 1957 को ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी का छात्र होते हुए पटौदी ने ससेक्स की तरफ से प्रथम श्रेणी मैच खेला था. 1 जुलाई 1961 को एक कार एक्सीडेंट में नवाब पटौदी का दाहिनी आंख खराब हो गई थी, लेकिन नवाब पटौदी को कभी ऐसा नहीं लगा था कि वह दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगे.

उन्होंने अपनी आत्मकथा में  लिखा है कि ऑपरेशन के तीन-चार हफ्ते के बाद वह नेट में प्रैक्टिस करने के लिए पहुंचे गए थे.दाहिनी आँख ख़राब होने के कारण उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन समय के अनुसार उन्होंने हर मुश्किल का डटकर सामना किया और उन पर विजय प्राप्त की.

नवाब मंसूर अली खान पटौदी उर्फ़ नवाब पटौदी, उर्फ़ टाईगर पटौदी


द ग्रेट इंडियन क्रिकेट स्टोरी’ लिखने वाले राजदीप सरदेसाई बताते हैं कि जब पटौदी भारतीय टीम के कप्तान बने तो उनकी उम्र थी मात्र 21 वर्ष और 70 दिन. 1962 में नारी कॉन्ट्रेक्टर की कप्तानी में पांच टेस्ट मैच खेलने के लिए भारत ने वेस्टइंडीज का दौरा किया और पटौदी का टीम में चयन हुआ. दूसरे टेस्ट मैच में भारतीय टीम के कप्तान नारी कॉन्ट्रैक्टर उस समय दुनिया के सबसे तेज़ गेंजबाज़ चार्ली ग्रिफ़िथ की गेंद से घायल हो गए.टीम के मैनेजर ग़ुलाम अहमद ने उपकप्तान पटौदी को सूचित किया कि अगले टेस्ट में वे भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे.  सिर्फ 21 साल की उम्र में कप्तान बनकर उन्होंने भारत में सबसे कम उम्र का कप्तान बनने का रिकॉर्ड बनाया. इस तरह पटौदी युग की शुरुआत हुई जिसने भारतीय क्रिकेट को नई परिभाषा दी.
साठ के दशक में जब पटौदी ने भारतीय क्रिकेट की बागडोर संभाली तो भारतीय क्रिकेट की स्थिति ऐसी ही थी जैसी कि आजकल ज़िंबाब्वे की है. ये पटौदी का ही बूता था कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों में पहली बार विश्वास जगाया कि वो भी जीत सकते हैं. उनकी कप्तानी में ही भारत ने 1967 में न्यूजीलैंड को उसकी ही धरती पर मात देते हुए विदेशी धरती पर अपनी सबसे पहली जीत दर्ज की थी.
 
बिशन सिंह बेदी का मानना है कि ‘भारतीय क्रिकेट में पटौदी हर किसी से कम से कम सौ साल आगे थे’.उनकी टीम के एक और सदस्य प्रसन्ना कहते हैं कि “क्लास और लीडरशिप क्या होती है, इसका अंदाज़ा पटौदी के मैदान में उतरने के ढंग से लग जाता था. शायद दुनिया में दो ही खिलाड़ी ऐसे हुए हैं जिन्हें उनकी कप्तानी की वजह से टीम में शामिल किया जाता था. एक थे इंग्लैंड के कप्तान माइक ब्रेयरली और दूसरे मंसूर अली ख़ाँ पटौदी”.
पटौदी की शादी  1969 में अभिनेत्री शर्मिला टैगोर से हुई थी. उनके तीन बच्चों में से सैफ अली खान और सोहा अली खान बॉलीवुड के चर्चित कलाकार हैं. तीसरी सबा अली खान ज्वेलरी डिजाइनर हैं.टाइगर खुद एक शानदार हैंडसम शख्सियत थे, जिन्हें बॉलीवुड भी बहुत चाहता था. इस शादी को क्रिकेट और बॉलीवुड की सबसे चर्चित शादियों में गिना जाता है.

नवाब पटौदी, पत्नी शर्मीला टैगोर, बेटी सबा अली खान और सोहा अली खान, बेटे सैफ अली खान, बहु करीना कपूर खान


 
पटौदी को खेल जगत में उनके खास योगदान के लिए अर्जुन अवॉर्ड और पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा गया है. क्रिकेट करियर के दौरान साल 1962 में पटौदी ‘इंडियन क्रिकेटर ऑफ द ईयर’ रहे, वहीं साल 1968 में उन्हें ‘विस्डन क्रिकेटर ऑफ द ईयर’ चुना गया.साल 2007 में उनके नाम पर भारत और इंग्लैंड के बीच पटौदी ट्रॉफी का आयोजन किया गया.