लॉकडाऊन काफ़ी नही, टेस्टिंग बढ़ाईए और ” न्याय योजना ” लाकर आर्थिक संकट से निपटिये – राहुल गांधी

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कोरोना से उपजे आर्थिक संकट से निबटने के लिए राहुल गांधी ( Rahul Gandhi ) ने लोकसभा चुनाव की अपनी महत्वाकांक्षी “न्याय योजना ” ( NYAY ) को अपनाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि हर देशवासी को न्यूनतम आय की इस योजना को सरकार भले ही अपने किसी नाम से ले आये। राहुल ने कहा कि गरीबों के खाते में डायरेक्ट पैसे भेजिए। छोटे और लघु उद्योगों के लिए सरकार पैकेज तैयार करे ताकि रोजगार न छिनें। कंपनियों के लिए प्रोटेक्शन तैयार कीजिए।

राहुल गांधी बोले – लॉकडाउन से कोरोना को पूरी तरह नहीं हरा सकते

कांग्रेस नेता राहुल गांधी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया । इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह Covid-19 संकट और संबंधित मुद्दों पर बात कर रहे हैं। कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने 3 मई तक लॉकडाउन को बढाने का फैसला किया है। इस लॉकडाउन के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर कांग्रेस सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर है।

राहुल गांधी ने कहा कि कोरोना वायरस (Corona Virus )  के कारण भारी आर्थिक परेशानियों को सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि राज्यों के लिए अधिक केंद्रित और लॉकडाउन पर पीएम और मुख्यमंत्रियों के बीच अधिक विस्तृत बातचीत होनी चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि लॉकडाउन कोई रास्ता नहीं है इस वायरस को हराने का, इससे सिर्फ कुछ समय के लिए इसे रोका जा सकता है। लॉकडाउन हटने के बाद वायरस फिर अपना काम करना शुरू कर देगा।
राहुल गांधी ने कहा कि देश भर में लॉकडाउन को रणनीति के तहत खोलना होगा। राहुल ने कहा कि दो बुनियादी क्षेत्र बनाए जाने चाहिए। हॉटस्पॉट ज़ोन, नॉन-हॉटस्पॉट ज़ोन और आक्रामक रूप से टेस्टिंग का उपयोग करना चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा कि देश में तेजी से कोरोना टेस्ट की जरूरत है। आक्रामक रूप से कोरोना वायरस का परीक्षण करें, इसे लड़ने के लिए राज्यों की सहायता करें। राहुल गांधी ने कहा है कि भारत की कोरोना टेस्टिंग की दर अभी 199 प्रति लाख है जो बहुत कम है, परीक्षण को तेज करने की जरूरत है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि जो हुआ वह हो गया लेकिन अब इमर्जेंसी सिचुएशन है। अब आगे देखते हैं और मिलकर हिंदुस्तान यूनाइट होकर कोरोना से लड़े। इससे देश को भी फायदा होगा। रणनीतिक तौर पर काम करें। लॉकडाउन हुआ तो बात बनी नहीं बल्कि पोस्टपोन हुई है। रिसोर्सेज को स्टेट के हाथ दीजिए। राज्यों को जीएसटी दीजिए। मुख्यमंत्रियों और जिलों के प्रशासन से खुलकर बात कीजिए और उनकी जो जरूरतें हैं उन्हें पूरा कीजिए। जिले स्तर पर कार्रवाई हो, निचले स्तर पर कार्रवाई हो।