प्रियंका यूपी में मुस्लिमों पर दांव खेलने वाली हैं।

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कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिये बहुत अच्छे से एक्टिव है। हाल ये है कि प्रत्याशी और प्रभारी से लेकर संग़ठन लेवल पर पार्टी खुद को एक्टिव करना शुरू कर चुकी है। प्रियंका से लेकर प्रदेश अध्यक्ष लल्लू सिंह, इमरान मसूद और अराधना मिश्रा जैसे नाम ज़मीन पर उतर कर मेहनत कर रहे हैं।

इमरान प्रतापगढ़ी जैसे नामों को कार्यकर्ताओं को लुभाने के लिए यूपी तलब किया जा रहा है।अब इसके बाद तैयारी ये है कि पार्टी अपने पुराने वोट बैंक को अपनी तरफ लौटाकर ले आये इसलिए वो दलित और मुस्लिमों जैसे अपने पुराने समर्थक और साथी रहें समाज को लुभाने की कोशिश में जुट गई है।

 

पार्टी के विश्वसनीय सूत्रों से ये मालूम चला है कि पार्टी बहुत जल्द उत्तर प्रदेश के चार या तीन नए कार्यकारणी अध्यक्ष बना सकती है। जिसमें एक दलित समाज एक मुस्लिम समाज और एक ब्राह्मण समाज से हो सकते हैं। इसके द्वारा पार्टी खुद को दोबारा से मज़बूत करने की कोशिशों में है। पार्टी में मुस्लिम कार्यकारिणी अध्यक्ष पर जिस नाम पर सबसे ज़्यादा चर्चा है वो हैं इमरान मसूद और नसीमुद्दीन सिद्दीकी।

दरअस्ल प्रियंका गांधी उन चुनिंदा नेताओं में से एक हैं जो सीऐऐ कानून के दौरान हुई हिंसा के बाद मृत हुए घरों पर गयी थी और उनमें ज़्यादातर मुस्लिम समाज के लोग थे। जिसके बाद प्रियंका गांधी को लेकर मुस्लिमों में एक सहानभूति जागी थी। अब कांग्रेस उस पर काम करना चाहती है।

कौन है इमरान और नसीमुद्दीन?

इमरान मसूद कांग्रेस के सहारनपुर ज़िलें के सबसे मज़बूत नेता हैं जो अपने दम पर पार्टी को वहां और आस पास के क्षेत्र में चलाने का जज़्बा रखते हैं । हाल ये है कि उनकी पार्टी के विधायक खुले आम ये बात कहते हैं कि “हमें विधायक इमरान मसूद ने बनाया है” वहीं वो 2014 में मोदी लहर में भी वो 4 लाख वोट लेकर आये थे।

राहुल गांधी के साथ इमरान मसूद

इसके अलावा उनकी ज़मीनी पकड़ बहुत शानदार बताई जाती है, पार्टी के संग़ठन से लेकर विपक्ष तक मे वो अपनी महत्वता रखते हैं। इसी वजह से उनका नाम कार्यकारिणी अध्यक्ष या फिर पश्चिमी यूपी के प्रभारी के तौर पर चर्चा में चल रहा है। हो ये भी सकता है कि उन्हें पश्चिमी यूपी का प्रभारी बनाकर ज़मीनी मेहनत की ज़िम्मेदारी दे दी जाए।

इनके बारे में वेस्ट यूपी की राजनीति के जानकार खालिद इक़बाल बताते हैं कि “इमरान मसूद वेस्ट यूपी में कांग्रेस को आज भी जिंदा रखे हुए हैं,वो अपने दम पर राजनीति हैंडल करते हैं और अपने हिसाब से भी,पार्टी अगर उन्हें वेस्ट यूपी की ज़िम्मेदारी देती है तो पार्टी को फायदा होना लाज़मी है क्योंकि मुसलमानों में उनकी पहुंच है”

नसीमुद्दीन सिद्दीकी बसपा के एक वक्त में दूसरे नम्बर के नेता रहे हैं। 2007 कि बसपा की मायावती सरकार में उन्हें क़रीबन 15 मंत्रालयों का केबिनेट मंत्री बनाया गया था। बहुजन समाज पार्टी में वो सबसे बड़ा मुस्लिम नाम हुआ करते थे लेकिन वक़्त बदला और वो 2019 में कांग्रेस में आ गए और उन्हें बिजनोर लोकसभा से प्रत्याशी बनाया गया।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी

तब से अब तक वो कांग्रेस में जमे हैं, हालांकि बहुत मज़बूत ज़मीनी नेता के तौर पर नसीमुद्दीन नहीं जाने जाते हैं और न ही उनकी कोई ऐसी उपलब्धि है जिसे मुसलमान याद करते हुए आकर्षित होगा लेकिन हां वो एक बड़ा नाम हैं जिन्होने संग़ठन में काम किया है,और उन्हें अनुभव भी काफी रहा है।

सीनियर जर्नलिस्ट ज़ेग़म मुर्तजा नसीमुद्दीन सिद्दीकी और कांग्रेस के बारे में बताते हैं कि “नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी अच्छे नेता हैं। संगठन बनाने और उसे बड़ा करने की समझ उनमें है लेकिन कांग्रेस हमेशा की तरह देर से फैसले ले रही है। अब जबकि चुनाव सिर पर हैं और कांग्रेस संगठन बनाने की क़वायद कर रही है।

यह काम साल भर पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था। सीएए समेत मुसलमान, दलित और किसानों के तमाम मुद्दों पर पिछले पांच साल में कांग्रेस के अलावा ज़मीन फर कोई पार्टी नज़र नहीं आई लेकिन चुनाव में लोग दूसरी पार्टियों की तरफ देख रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यही है कि सांगठनिक तौर पर कांग्रेस कमज़ोर दिख रही है।”