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मीडिया – जम्मू कश्मीर में नौकरी का विज्ञापन, खबर और विज्ञापन का वापस लिया जाना

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अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने वैकेंसी निकाली। कल के अखबारों में यह खबर प्रमुखता से छपी थी। दैनिक भास्कर में यह पहले पन्ने पर थी। दूसरे अखबारों में भी प्रमुखता से छपी थी। आज टेलीग्राफ में खबर है कि इस विज्ञापन को वापस ले लिया गया है। आज के भास्कर में विज्ञापन वापस लिए जाने की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। विज्ञापन वापस लिया जाना भी खबर है, पर हिन्दी के अखबारों में मुझे यह खबर पहले पन्ने पर नहीं मिली। वैसे, ऐसा कोई नियम, रिवाज भी नहीं है कि खबर का खंडन उसी प्रमुखता से छापा जाए। लेकिन विज्ञापन खबर है तो उसे वापस लिया जाना भी खबर है और अगर एक कल छपी थी तो दूसरी आज छपनी चाहिए थी। हिन्दी अखबारों में पहले पन्ने पर तो नजर नहीं आई। टेलीग्राफ की इस खबर को मानें तो जम्मू के हिन्दू बाहुल्य ज़िले ही इस विज्ञापन के खिलाफ थे।
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खबरों का खंडन उसी प्राथमिकता से छापने का रिवाज या नियम जानबूझकर छापी जाने वाली गलत खबरों के मामले में भी नहीं है। गलत खबर से होने वाले नुकसान की भरपाई का कोई नियम इस देश में नहीं है। अदालतों को इस फैसले का भी सम्मान नहीं हुआ है, कि खबर जितनी प्रमुखता से छपी (या टेलीविजन पर दिखाई गई थी) उतनी ही प्रमुखता से उसका खंडन या उसके गलत होने की सूचना छपे। आम आदमी के लिए ऐसा कोई नियम नहीं है तो सरकारी खबर और उसपर भी विज्ञापन के मामले में क्या कुछ होना है। लेकिन मुद्दा यही है, सरकारी नौकरी का विज्ञापन खबर इसीलिए है कि यह अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पहला विज्ञापन था।
जम्मू डेटलाइन से छपी एजेंसी की इस खबर में कहा गया है, “जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने नॉन गेजेडेट पदों के लिए देशभर से आवेदन मंगाए हैं। 5 अगस्त को राज्य से अनुच्‍छेद 370 और 35ए खत्म होने के बाद नौकरियों के लिए यह पहला नोटिस है। ऐसा पहली बार है, जब कश्मीर घाटी में सरकारी नौकरी के लिए योग्यता कश्मीर और लद्दाख के स्थायी निवासियों तक सीमित नहीं है। आरक्षित पदों के लिए चयन जम्मू कश्मीर आरक्षण नियम 2005 के तहत होगा जिसमें कहा गया है, कि उपलब्ध नौकरियां स्थायी निवासियों के पक्ष में होंगी कुल 33 पदों में से 17 ओपन मेरिट कैटेगरी के हैं। इसका मतलब है कि जम्मू कश्मीर के बाहर का कोई भी व्यक्ति इन पदों के लिए चुना जा सकता है। आवेदन की आखिरी तारीख 31 जनवरी 2020 है। ओपन मेरिट में आवेदन की आयु सीमा 18 से 40 साल के बीच रखी गई है। वहीं आरक्षित पदों में आयु सीमा 43, दिव्यांगों के लिए 42 और पूर्व सैनिकों के लिए 48 साल रहेगी। इससे पहले राज्य के स्थायी निवासी की शर्त रहती थी यानी जो जम्मू कश्मीर और लद्दाख के निवासी है।
इस खबर (विज्ञापन) के रद्द होने की खबर एक ही दिन बाद आ गई यह इस खबर की अस्थिरता है और यही कश्मीर की हालत है। इसलिए इस खबर पर नजर रखी जानी चाहिए थी। अखबारों की सूचना पर जीने और इसी से लोकप्रियता पाने वालों की राजनीति के लिहाज से यह एक महत्वपूर्ण खबर है। यह एक खास किस्म की पत्रकारिता भी है। इसपर अभी तक आम लोगों की नजर नहीं है, लेकिन होनी चाहिए। टेलीग्राफ की खबर का लिंक यहाँ पर देख सकते हैं । टेलीग्राफ में विज्ञापन वापस लिए जाने की यह खबर पहले पन्ने पर शुरू होकर अंदर खत्म हुई है। कल यह खबर पहले पन्ने पर तो नहीं थी। विज्ञापनों की राजनीति और राजनीतिक पत्रकारिता का अपना मनोरंजन है। खासकर तब जब विज्ञापन खबर हो और खबरों का प्रत्यक्ष परोक्ष भुगतान हो।

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