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भारतीय क्रिकेट के टाईगर थे "नवाब पटौदी"

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मंसूर अली खान पटौदी उर्फ़ नवाब पटौदी उर्फ़ टाइगर पटौदी का जन्म आज ही के दिन 5 जनवरी 1941 को भोपाल में हुआ था। क्रिकेट का शौक़ इन्हें विरासत में मिला था। इनके पिता इफ़्तिख़ार अली खान एक जाने माने क्रिकेटर थे। इनके पिता इंग्लैंड में क्रिकेट सीखे थे और वहाँ टेस्ट में देश का प्रतिनिधित्व किया था। इसके बाद वे भारत आकर राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व भी किया था।
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इनका पटौदी स्टेट 1947 में भारत में विलय हो गया था। 1952 में इफ़्तिख़ार अली खान का देहांत दिल्ली में पोलो खेलते वक़्त हो गया था। बाद में ये पटौदी रियासत के नौवें नवाब बने। 1952 से लेकर 1971 तक ये पटौदी रियासत के नवाब थे। बाद में नवाब टाइटल संविधान की 26वीं संशोधन के ज़रिये 1971 में ख़त्म हो गया था।
नवाब पटौदी भी क्रिकेट खेलना इंग्लैंड से शुरू किया था, ये वहाँ ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय की टीम का नेतृत्व भी करते थे, ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय की टीम का नेतृत्व करने वाले एकमात्र भारतीय नवाब पटौदी हैं।
1961 में एक ज़बरदस्त कार दुर्घटना में इनकी आँख पर चोट लग गई थी, उस वक़्त इनकी उम्र 20 वर्ष की थी। इतनी बड़ी दुर्घटना होने के बावजूद जिसमें इनका एक आँख ख़राब हो गया था फिर भी इन्होंने क्रिकेट नहीं छोड़ा, इसके बाद ही ये इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपना पहला टेस्ट मैच खेले।
नवाब पटौदी क्रिकेट की दुनिया में जाना पहचाना नाम है, ये क्रिकेट खेलने वाले सभी देशों की टीमों में आजतक के सबसे युवा कप्तान हैं। ये मात्र 21 वर्ष की उम्र में टीम के कप्तान बने थे और उस वक़्त के सभी टीम सदस्य इनसे उम्र में बड़े थे। क्रिकेट के क्षेत्र में इन्होंने बहुत सी उपलब्धियाँ हासिल की। अपने समय के बेहतरीन बल्लेबाज़ों में से एक थे। एक आँख ख़राब होने के बावजूद इन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम को बहुत कुछ दिया। इन्हें भारत का महान क्रिकेट कप्तान भी कहा जाता है।

छोटे नवाब सैफ अली खान अपने पिता नवाब पटौदी के साथ


क्रिकेट और सिनेमा के बीच रोमांस की कहानी बहुत पुरानी हैं, बॉलीवुड और क्रिकेट दोनों भारत में काफ़ी लोकप्रिय हैं। टीम इंडिया और बॉलीवुड अभिनेत्रियों के बीच रोमांस के क़िस्से बहुत सुनने को मिलते हैं। इन्हीं जोड़ियों में टाइगर पटौदी और शर्मिला टैगोर का नाम भी आता है। दोनों बड़े परिवार से ताल्लुक़ रखते थे। कहा जाता है कि दोनों की पहली मुलाक़ात 1965 में दिल्ली में हुई थी, शर्मिला उन दिनों फ़िल्म की शूटिंग के सिलसिले से दिल्ली आई हुई थीं। दोनों की मुलाक़ात वहीं पर हुई, उस वक़्त नवाब मंसूर पटौदी टीम इंडिया के कप्तान थे एवं सबसे युवा खिलाड़ी थे। पहली ही नज़र में पटौदी को शर्मिला भा गई लेकिन दिल जीतने में लगभग 4 साल लग गए थे।
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नवाब पटौदी और शर्मीला टैगोर


ये भी कहा जाता है कि शर्मिला जब भी टाइगर पटौदी का मैच देखने जाती थीं तो उनका स्वागत छक्के से किया करते थे। 27 दिसम्बर 1968 को नवाब पटौदी ने अभिनेत्री शर्मिला टैगोर से शादी की। इनके तीन बच्चे हुये। बॉलीवुड अभिनेता सैफ़ अली खान, अभिनेत्री सोहा अली खान और आभूषण डिजाइनर सबा अली खान।

नवाब पटौदी की अंतिम यात्रा का एक दृश्य


टाइगर पटौदी की मृत्यु 22 सितम्बर 2011 को नई दिल्ली में हुई थी। इनको दिल्ली के पास पटौदी स्थिति इनके महल में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। टाइगर पटौदी को क्रिकेट के प्रति उत्कृष्ट योगदान के लिए 06 फ़रवरी 2013 को बीसीसीआई ने मंसूर अली खान पटौदी मेमोरियल व्याख्यान की शुरूआत की थी। इन्हें 1964 में अर्जुन पुरस्कार एवं 1967 में पद्म श्री से भी नवाज़ा गया था।
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