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सोशलमीडिया के हालत ये है कि बन्दर के हाथ में उस्तरा आ गया है

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मार्क ज़ुकरबॉर्ग ने सोशल मीडिया साइट फेसबुक ये सोच कर बनाया होगा की इसके ज़रिये दूर दराज़ और विदेशों में रह रहे लोग अपने लोगों से परिवार से और दोस्तों से लगातार संपर्क बनाए रखेंगे और अपने विचार, अपनी तस्वीरें और सन्देश शेयर करते रहेंगे। पर उन्हें भी क्या मालूम रहा होगा की फेसबुक फ़ेकबुक बन जायेगी और फितना फसाद और समाज में ज़हर फैलाने में अहम भूमिका निभाएगी। अब हालत ये है कि बन्दर के हाथ में उस्तरा आ गया है और वो अपने लोगो को अपने समाज को और देश को नुकसान फैलाने और सांप्रदायिक दरार पैदा करने में इस्तेमाल कर रहा है। झूठे वीडियो टेम्पर्ड फोटोशॉप तस्वीरें शेयर हो रही हैं। एक दूसरे के मज़हब के खिलाफ जम कर ज़हर और फिर ग्रुप में गली ,गलौज और ट्रॉल्लिंग हो रही है। राजनैतिक पार्टियों ख़ास कर भाजपा और संघ परिवार ने भारतीय समाज में बड़े पैमाने पर विभाजन के लिए और नफरत फैलाने के लिए साइबर सेल का गठन किया है और हज़ारो बेरोजगार आई उनके लिए काम कर रहे हैं और दुष्प्रचार कर समाज में ज़हर घोल रहे हैं। ऐसा कर भाजपा की राजनैतिक लाभ और सत्ता भले ही मिल जाय ,लेकिन देश और समाज को बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है। जगह-जगह सांप्रदायिक दंगे हो रहे हैं। लूट मार और बलात्कार हो रहा है। फ़र्ज़ी गौ रक्षकों की बाढ़ आई हुई है,जो राह चलते मुसाफिरो को मज़हब के नाम पर पीट दे रहे हैं, यहन तक उनकी हत्या तक करने से उन्हे परहेज़ नही है। राम नवमी या दूसरे जलूस के बहाने वर्ग विशेश के खिलाफ नारेबाज़ी और फिर तंव भड़का रहे हैं, धमकियां दे रहे हैं, जिसके बाद दंगा और फसाद हो रहा है। अभी झारखण्ड के रांची और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में बवाल कराया गया है। इस तरह से तीज त्यौहार भी ख़ुशी मनाने के बजाये नफरत फैलाने और अशांति की वजह बनते जा रहे हैं। ऐसे ही चलता रहा और विरोधी पार्टियां भी खामोश तमाशा देखती रही और समझदार लोगो ने आवाज़ नहीं उठाई तो वो दिन दूर नहीं जब हमें भी अफगानिस्तान और पाकिस्तान के जैसे हालात का सामना करना होगा, जो बाद में सिविल वॉर की वजह बन सकती है।
तारेक फतेह और तस्लीम नस्रीन की तरह कुछ ऐसे लोग जो इस्लाम और मुस्लिमो के विरुद्ध बोल्ते हैं, मीडिया और संघ के लोग उन्हे जानबूझकर बधाव दे रहे हैं. इस तरह सोशल मीदिय अब फेक न्यूज़ और अफ्वाह के साथ-साथ इस तरह के लोगो का अड्डा बनते जा रह है.

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